ओडिशा में ट्रेन हादसे में कुल तीन ट्रेनें आपस में टकरा गईं। उनमें से दो पैसेंजर ट्रेनें थीं और एक मालगाड़ी थी। इन दो मैसेंजर ट्रेनों में एक कोरोमंडल एक्सप्रेस और एक बेंगलुरु हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस शामिल थी। सुबह 6:00 बजे तक 288 लोगों की मौत हो चुकी है और 1100 लोग घायल हुए हैं।
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- ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार शाम करीब 7 बजे हुआ ट्रेन हादसा इतना भयानक था कि कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन के कई कोच तबाह हो गए। एक इंजन तो मालगाड़ी के रैक पर ही चढ़ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि खिड़कियों के कांच टूट गए और करीब 50 लोग बाहर जाकर गिरे। टक्कर | इतनी जोरदार थी कि कोरोमंडल एक्सप्रेस की 15 बोगी पटरी से उतर गईं. ट्रेन के कई डिब्बे मालगाड़ी पर चढ़ गए. यह ट्रेन पश्चिम बंगाल के शालीमार से चेन्नई सेंट्रल जा रही थी.
- अंधेरा होने के कारण रोते-बिलखते लोग अपनों को तलाशते रहे। कुछ को धड़ मिला तो सिर नहीं। लोग चीखते हुए अपनों के टुकड़े बटोरते दिखे। हालात ऐसे थे कि बोगियों में फंसे बच्चों और महिलाओं को कोच से बाहर निकालने के लिए सीढ़ी का सहारा लेना पड़ा। ट्रेन में फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के स्थानीय लोग भी देर रात तक जी-जान से जुटे दिखे। अस्पताल में भी घायलों की मदद के लिए कई लोग खड़े थे।
- इस हादसे में सुबह 6 बजे तक 288 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 1100 से ज्यादा लोग घायल हैं। ऐसे में मरने वालों का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। एक्सीडेंट में घायल हुए लोगों ने इस हादसे का जो आंखों देखा हाल बताया, उससे समझा जा सकता है कि हादसा कितना भयावह था।
- मैं 6:40 पर बालासोर से ट्रेन में बैठा, 6:55 पर हादसा हो गया एक पैसेंजर सौम्यरंजन शेट्टी ने बताया कि वे भद्रक ब्लॉक में रहते हैं और बालासोर में नौकरी करते हैं। शाम को घर जाने के लिए उन्होंने 6:40 बजे बालासोर से कोरोमंडल ट्रेन पकड़ी। 6:55 पर बहानगा स्टेशन पर कुछ आवाज आई और ट्रेन पलट गई। तब हमें समझ आया कि ट्रेन का एक्सीडेंट हो गया है। जैसे ही ट्रेन रुकी, तो मैं पहले बाहर निकला। मेरे साथ जो तीन-चार लोग थे, उनका रेस्क्यू किया गया। एक आदमी मुझे पकड़कर नीचे लाया और पानी पिलाया। इसके बाद मुझे एम्बुलेंस में बिठाकर अस्पताल लाया गया।
- न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि पहले यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस डिरेल हुई। इसके कुछ डिब्बे दूसरी पटरी पर पलटे और दूसरी तरफ से आ रही शालीमार- चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस से टकराए। इसके बाद कोरोमंडल ट्रेन की भी कुछ बोगियां पटरी से उतर गई। ये बोगियां दूसरे ट्रैक पर मालगाड़ी से भिड़ गई। कुछ गई। बोगियां मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गईं ।
ट्रेन नंबर 12864 बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस :
1 जून को सुबह 7:30 बजे यशवंतपुर स्टेशन से चली थी। इसे 2 जून को शाम करीब 8 बजे हावड़ा पहुंचना था। समय से 3.30 घंटे की देरी से 6:30 बजे भद्रक (Odisha) पहुंची। अगला स्टेशन था, जहां ट्रेन 4 घंटे की देरी से 7:52 पर पहुंचने वाली थी।
ट्रेन नंबर 12841 शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस :
2 जून को ही दो बजे हावड़ा से रवाना हुई थी। ये 3 जून को शाम 4:50 बजे चेन्नई सेंट्रल पहुंचती। सही समय पर 6:37 बजे बालासोर पहुंची। अगला स्टेशन भद्रक था जहां ट्रेन को पहुंचना था। लेकिन, 7 बजे करीब दोनों ट्रेन बहानगा बाजार स्टेशन के पास से आ से गुजरीं, तभी हादसा हुआ।
- देश के चार सबसे बड़े रेल हादसे :
- बिहार में पुल पार करते समय एक पैसेंजर ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी। जिसमें 750 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। यह भारत | का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा है। यह रेलवे हादसा 6 जून 1981 में हुआ था।
- फिरोजाबाद के पास पुरुषोत्तम एक्सप्रेस खड़ी कालिंदी एक्सप्रेस से टकरा गई। इस हादसे में 305 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। यह रेलवे हादसा 20 अगस्त 1995 में हुआ था।
- ब्रह्मपुत्र मेल उत्तर रेलवे के कटिहार डिवीजन के गैसल स्टेशन पर खड़ी अवध असम एक्सप्रेस से टकरा गई। जिसमें 285 से अधिक लोग मारे गए थे। यह रेलवे हादसा 20 अगस्त 1995 में हुआ था।
- जम्मू तवी - सियालदह एक्सप्रेस पंजाब में गोल्डन टेंपल मेल के पटरी से उतरे तीन डिब्बों से टकरा गई थी, जिसमें 212 लोगों की मौत हो गई थी। यह रेलवे हादसा 26 नवंबर 1998 में हुआ था।
- राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई :
- पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव एच के द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार मंत्री मानस भुइयां और सांसद डोला सेन के नेतृत्व में एक टीम मौके पर भेज रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ निजी रूप से स्थिति की निगरानी कर रही हैं। बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ओडिशा सरकार और दक्षिण पूर्व रेलवे के साथ समन्वय कर रही है।
- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने रेल दुर्घटना होने के बाद ओडिशा के अपने समकक्ष नवीन पटनायक से बात की और घोषणा की कि वह ट्रेन में सवाल तमिलनाडु के लोगों के बचाव के समन्वय के लिए चार सदस्यीय पैनल की तैनाती कर रहे हैं।
- कुछ पुराने रेल हादसे :
14 साल पहले भी पटरी से उतरी थी कोरोमंडल ट्रेन 3 फरवरी 2009 को ओडिशा के जजपुर जिले में ट्रैक बदलते समय कोरोमंडल एक्सप्रेस की 13 बोगियां पटरी से उतर गई थीं। हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी । इत्तेफाक से उस दिन भी शुक्रवार था।
इसके अलावा 15 मार्च, 2002 को दोपहर में आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में इसके सात डिब्बे पटरी से उतर गए थे। हादसे में 100 यात्री घायल हुए थे। 14 जनवरी 2012 को ओडिशा में लिंगराज स्टेशन के पास इस ट्रेन के जनरल डिब्बे में आग लगी थी।
- गोवा-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन समारोह रद्द :
ओडिशा रेल हादसे के बाद आज होने वाला गोवा-मुंबई बंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन समारोह रद्द कर दिया गया। कोंकण रेलवे के अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि मडगांव स्टेशन पर गोवा-मुंबई बंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह को ओडिशा में ट्रेन दुर्घटना होने के मद्देनजर रद्द कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से गोवा-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने वाले थे और समारोह के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को मडगांव स्टेशन पर मौजूद रहना था। लेकिन ट्रेन हादसे का जायजा लेने के लिए वैष्णव ओडिशा जा रहे हैं।
- बंगाल से दक्षिण भारत जाने वाली सभी ट्रेनें रद्द :
रेलवे विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि इस दुर्घटना के बाद पश्चिम बंगाल से दक्षिण भारत की ओर जाने वाली सभी ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया है। भुवनेश्वर में अधिकारियों ने बताया कि राहत और बचाव कार्य में 115 एंबुलेंस, 50 बसें, 45 सचल स्वास्थ्य इकाई के साथ ही 1200 कर्मचारियों को लगाया गया है। घायलों की मदद के लिए बालासोर मेडिकल कॉलेज के बाहर दो हजार से ज्यादा लोग जमा हो गए। घायलों के लिए बड़ी संख्या में लोग ब्लड भी दे रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में 30 से अधिक घायलों की सर्जरी की गई है।
- कैसे दो ट्रेन एक ही पटरी पर आ जाती है?
दो ट्रेन एक ही समय पर एक ही पटरी पर कैसे आ जाती हैं, इसके दो कारण हो सकते हैं। एक मानवीय भूल और दूसरा तकनीकी खराबी । ओडिशा में ट्रेन हादसे के पीछे तकनीक में खराबी को अब तक वजह माना जा रहा है। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबकि सिग्नल की खराबी की वजह से दो ट्रेन एक ही पटरी पर आ गई और उनमें टक्कर हो गई। दरअसल, चालक ट्रेन को कंट्रोल रूम के निर्देश पर चलाता है और कंट्रोल रूम से निर्देश पटरियों पर ट्रैफिक को देख कर दिया जाता है।
इसे ऐसे समझिए कि हर रेलवे कंट्रोल रूम में एक बड़ी सी डिस्प्ले लगी होती है, जिस पर दिख रहा होता है कि कौन सी पटरी पर ट्रेन है और कौन सी पटरी खाली है। ये हरे और लाल रंग की लाइटों के माध्यम से दिखाया जाता है। जैसे कि अगर किसी पटरी पर कोई ट्रेन है या चल रही है तो वो लाल दिखाएगा और जो पटरी यानी रेलने ट्रैक खाली है, वह हरी लाइट दिखाता है। इसी को देख कर कंट्रोल रूम से लोकोपायलट को निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन इस बार जैसे हादसा हुआ, उसे देख कर ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि डिस्प्ले पर ट्रेन का सिग्नल सही नहीं दिखाई दिया और इसकी वजह से यह हादसा हुआ।
- टीएमसी ने की रेल मंत्री के इस्तीफे की मांग:
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पड़ोसी राज्य ओडिशा में हुए भीषण रेल हादसे को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के इस्तीफे की मांग की है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार रेल हादसों को रोकने के लिए उचित उपाय करने के बजाय विपक्षी नेताओं की जासूसी करने के लिए सॉफ्टवेयर पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनता को गुमराह करके राजनीतिक समर्थन हासिल करने के लिए वंदे भारत ट्रेनों और नवनिर्मित रेलवे स्टेशनों का बखान कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार ट्रेनों की सुरक्षा उपायों की उपेक्षा कर रही है। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि पीड़ित परिवारों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं और घायलों के जल्द स्वास्थ्य होने की कामना करते हैं। उन्होंने आगे लिखा, रेल मंत्री को अंतरात्मा की आवाज सुनकर अब पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
- क्या कवच फैल रहा ओडिशा ट्रेन आदित्य हादसे को रोकने मे ?
नहीं, इस ट्रैन हादसे में जो भी ट्रेन थी उनमें कवच सिस्टम था ही नहीं। भारतीय रेलवे अपनी दुर्घटना रोधी प्रणाली 'कवच' को ट्रेन एक्सीडेंट रोकने का कारगर उपाय मानता है। रेलवे का दावा है कि कवच तकनीक से लैस ट्रेनों का आपस में एक्सीडेंट नहीं हो सकता। यदि ये ट्रेन आमने-सामने आ जाएंगी तो यह तकनीन उन्हें खुद ही पीछे की तरफ धकेलने लगती है यानी ट्रेन का आगे बढ़ना रूक जाता है।
- कहां पहुंचा है कवच का सफर :
रेलवे बोर्ड ने पूरे देश में 34,000 किलोमीटर रेल ट्रैक पर कवच सिस्टम को लगाने की मंजूरी दी है. इसके लिए सबसे पहले साल 2024 तक सबसे व्यस्त रेल ट्रैक को इस सिस्टम से लैस करने का टारगेट तय किया गया है. इस तकनीक को रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की मदद से पूरे देश में रेलवे ट्रैक पर लागू किया जा रहा है. रेल मंत्री के राज्यसभा में दिए जवाब के हिसाब से इस तकनीक से दक्षिण मध्य रेलवे के 1,455 रूट कवर किए जा चुके हैं. कवच सिस्टम के लिए साल 2021-22 में 133 करोड़ रुपये दिए गए थे, जबकि साल 2022 2023 के वित्तीय बजट में भी कवच के लिए अलग से 272.30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
- TPWS को भी लागू कर रहा है रेलवे :
रेलवे ट्रेन में TPWS सिस्टम को भी लागू कर रहा है। TPWS यानी ट्रेन सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली एक ऐसा अहम सिस्टम है, जिससे एक्सीडेंट कम हो सकते हैं. दरअसल इसमें हर रेलवे सिग्नल इंजन के कैब में लगी स्क्रीन पर दिखाई देने की व्यवस्था की गई है. इससे पायलट घने कोहरे, बारिश या किसी अन्य कारण से खराब मौसम में भी कोई सिग्नल मिस नहीं करेगा. साथ ही उसे अपनी ट्रेन की सही गति भी मालूम रहेगी ताकि वह खराब मौसम में गति को धीमा रख सके। सरकार ने वर्ष 2012 में इस सिस्टम को विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की थी और इसका ट्रायल 2014 में शुरू हुआ था। रेल मंत्रालय ने पिछले साल कवच टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग की थी। जोरशोर से इसका प्रचार किया गया था। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव इस दौरान खुद एक ट्रेन पर सवार थे। कवच एक टक्कर रोधी तकनीक है। रेलवे का दावा है कि इस टेक्नोलॉजी से उसे जीरो एक्सीडेंट के अपने लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। कवच को साल 2020 में नेशनल ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के तौर पर अपनाया गया था।
- The following Help Line Numbers have been opened at Stations:
Howrah : 033-26382217
Kharagpur : 8972073925 & 9332392339
Balasore : 8249591559 & 7978418322
Shalimar : 9903370746
Santragachi : 8109289460 & 8340649469
Bhadrak : 7894099579 & 9337116373
Jajpur Keonjhar Road : 9676974398
Cuttack : 8455889917
Bhubaneswar : 06742534027
Khurda Road : 6370108046 & 06742492245
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